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9वीं सदी की बात है।
एक दिन संध्या समय अचानक आकाश से तीव्र गति से आता हुआ एक विशाल धूमकेतु (महाग्रह) धरती पर एक ऊँचे पर्वत-शिखर से टकराकर रुक जाता है। इस टक्कर के परिणामस्वरूप पृथ्वी के अनेक राज्यों में सूर्य का प्रकाश पहुँचना बंद हो जाता है। चारों ओर घना अंधकार छा जाता है। दिन और रात में कोई अंतर नहीं रह जाता—बस हर ओर अंधकार ही अंधकार फैल जाता है।
पर यह धूमकेतु केवल अंधकार ही नहीं लाता, बल्कि इसके साथ भयानक और विशाल ड्रैगन जैसे राक्षसी जीव भी पृथ्वी पर उतर आते हैं। ये दानव मानवों सहित सभी जीव-जंतुओं को मारकर खाने लगते हैं। धरती पर त्राहि-त्राहि मच जाती है।
ड्रैगनों के इस अत्याचार से भयभीत होकर पृथ्वी के सभी प्राणी अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगते हैं। सभ्यताएँ उजड़ने लगती हैं और जीवन विनाश के कगार पर पहुँच जाता है।
इसी समय एक बड़े राज्य के सबसे शक्तिशाली राजा भोरमदेव और रानी नागमती , अपने कुलगुरु भद्रदेव नाग की आज्ञा से, वर्षों से एक गुफा के भीतर गहन ध्यान में लीन रहते हैं। राजा और रानी फणी नाग वंशी कुल के शासक हैं, जिनका वंश प्राचीन और रहस्यमय शक्तियों से जुड़ा हुआ है।
राजा भोरमदेव के पास एक चमत्कारी पारसमणि यंत्र है, जबकि रानी नागमती के पास अद्भुत और दिव्य नागमणि है, जिनकी शक्तियाँ इस आने वाले विनाश को रोकने की आशा जगाती हैं।
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राजा और रानी के योग-ध्यान में लीन होने के समय में ही यह बड़ा विपत्ति आ जाता है।
इस राज्य के कुलगुरु भद्रदेव नाग बहुत ज्ञानी रहते हैं।
राज्य की सुरक्षा के सारे इंतज़ाम करने के बाद अपने सहयोगी ऋषियों के साथ ड्रैगन को नियंत्रण करने के लिए और इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए कुलगुरु भद्रदेव नाग एक योजना बनाते हैं।
विभिन्न मित्र राज्यों से पूर्ण स्वास्थ्य अविवाहित युवाओं और युवतियों के सहयोग से राजा और रानी को योग-ध्यान से जगाया जाए, ताकि राजा और रानी के काम-क्रिया से आध्यात्मिक मन को भौतिकता की तरफ़ ले जाया जा सके और राजा भोरमदेव के पारस यंत्र और रानी नागमती के नागमणि यंत्र को सफल संचालन कर सके और ड्रैगन के अत्याचार से मुक्ति दिला सके।
योग-ध्यान में लीन राजा और रानी को जगाने के लिए पाँच हजार युवा और युवतियों द्वारा रात-भर काम-क्रिया के निरंतर प्रयोग से राजा और रानी योग-ध्यान से जगाए जाते हैं। राजा और रानी भी काम-क्रिया में लग जाते हैं, जिसके कारण राजा और रानी के मनोभाव को अधात्मिकता से हटा कर भौतिकता की ओर लौटना पड़ता है
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छह माह रात ही रात में राजा भोरमदेव रानी नागमती सहित युवाओं और युवतियों के सहयोग से ड्रैगन से घोर युद्ध करते हैं। लेकिन ड्रैगन अपने माथे में लगे नीले टीके के माध्यम से अंधकार को अपनी शक्ति के रूप में इस्तेमाल कर और अधिक शक्तिशाली हो जाता है।
जब सब यंत्र असफल हो जाते हैं, तब राजा भोरमदेव और रानी नागमती कुलगुरु भद्रदेव नाग से ड्रैगन को मारने का अंतिम हथियार प्रयोग करने के लिए अनुरोध करते हैं। तब कुलगुरु भद्रदेव नाग अनुमति देते हुए “रक्षे” को युद्धभूमि में उतारते हैं।
कुलगुरु भद्रदेव नाग अपने सहयोगियों के साथ परग्रही ड्रैगन के DNA और अन्य पृथ्वी के शक्तिशाली जीवों के DNA को मिलाकर, राजा और रानी के जागरण के समय पूर्ण गोपनीयता रखते हुए “रक्षे” को पैदा कर विशाल राजमहल में रखे रहते हैं।
विशाल राजमहल लबालब पानी से भरे विशाल जलाशय के अंदर रहता है और आवश्यकता पड़ने पर पानी से ऊपर आ जाता है। यह खास वास्तुकला के सिद्धांतों पर बनाया गया है।
“रक्षे” इतने विशाल हैं कि हाथी इनके पैरों के घुटने तक ही आते हैं।
राजा भीमदेव इसी “रक्षे” के पीठ पर सवार होकर पारस मणि यंत्र और नागमणि यंत्र के सहयोग से परग्रही ड्रैगन के नीले टीके को भस्म करते हुए ड्रैगनों का वध करते हैं।
लेकिन पुनः ड्रैगन उस पुच्छल ग्रह से आ जाते हैं।
कुलगुरु भद्रदेव नाग “रक्षे” को निर्देश देते हैं कि वह अपनी पूरी शक्ति का उपयोग करते हुए अपने हाथों से पुच्छल ग्रह को धक्का दे।
तब “रक्षे” वैसा ही करता है और पुच्छल ग्रह पृथ्वी से दूर चला जाता है।
लेकिन उस पुच्छल ग्रह के दो-चार बड़े टुकड़ों के साथ चार ड्रैगन भी पानी के ऊपर स्थित विशाल राजमहल के ऊपर गिरते हैं, जिससे राजमहल की आधारशिला टूट जाती है और चारों ड्रैगन भी उस विशाल राजमहल में दब जाते हैं।
अब प्रश्न यह है—
क्या राजमहल को पानी के अंदर से बाहर निकाला जाएगा?
और क्या ड्रैगन भी जीवित बाहर निकल पाएँगे???